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Saturday, October 9, 2021
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मैं कब कहाँ क्या लिख दूँ इस बात से खुद भी बेजार हूँ मैं किसी के लिए बेशकीमती किसी के लिए बेकार हूँ समझ सका जो अब तक मुझको कायल मेरी छवि का...
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क्यों अपना ही घर हमें, छोड़कर भागना पड़ा हुक्मरान थे नींद में, हमें जागना पड़ा पुस्तैनी ज़मीं छोड़ी, सपनों का मकाँ गया किलकारियों से गूँजता,...