इससे बुरा शायद कोई व्यवहार नहीं होगा
तुम्हें मौत के घाट उतार दिया कुछ नीच शैतानों ने
सिर्फ मोमबत्ती जलाने से तेरा उद्धार नहीं होगा |
अब जलाना होगा करके खड़ा उनको चौराहे पे
जिसने लाकर खड़ा कर दिया इंसानियत को दोराहे पे
अब धर्म जाति के नाम का कोई हथियार नहीं होगा
जब जलते देखेंगे तो फिर कभी बलात्कार नहीं होगा |
सिर्फ भाषण से नारी शक्ति का सम्मान नहीं होता
जो नोच खाए बोटी तलक वो इंसान नहीं होता
कुछ ऐसा कर दो संशोधन जो बेकार नहीं होगा
जिससे फिर किसी माँ बाप का आँगन बेजार नहीं होगा |
देवी की उपमा देते है फिर खुद ही दुशासन बन जाते हैं
चीर हरण के रक्षक जब खुद ही चीर उड़ाते हैं
ऐसे ही किसी देवी का शायद त्यौहार नहीं होगा
बेटी! तुम खुद ही शस्त्र संभालो,
इस कलयुग मे कृष्ण का अवतार नहीं होगा
इस कलयुग मे कृष्ण का अवतार नहीं होगा ||
#justiceformoumita
👏👏👌👌
ReplyDeleteशुक्रिया 🙏
DeleteBahut badhiya..
Deleteसटीक
ReplyDeleteबहुत बहुत आभार गुरुजी 🙏
Deleteएकदम सही,प्रेरक अभिव्यक्ति।
ReplyDeleteसादर।
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जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना मंगलवार २० अगस्त २०२४ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
बहुत बहुत शुक्रिया
Delete💯💯💯💯
ReplyDelete🙏
Deleteबहुत सुन्दर
ReplyDeleteबहुत बहुत आभार
Deleteसटीक अभिव्यक्ति
ReplyDeleteबहुत बहुत शुक्रिया
Deleteबेटी! तुम खुद ही शस्त्र संभालो,
ReplyDeleteइस कलयुग मे कृष्ण का अवतार नहीं होगा
इस कलयुग मे कृष्ण का अवतार नहीं होगा ||
...सच यही है कि खुद ही शस्त्र उठाना होगा., कोई नहीं बचाने वाला,,,,,दुर्गा, लक्ष्मी, काली का रुप धारण करना होगा,,,
.....बहुत प्रेरक सामयिक चिंतनशील रचना,,,,
बहुत बहुत आभार महोदया 🙏
Delete''जब जलते देखेंगे तो फिर कभी बलात्कार नहीं होगा''
ReplyDelete...
''बेटी! तुम खुद ही शस्त्र संभालो''
///अब यही जरूरी है///
शुक्रिया महोदय 🙏
Deleteबहुत ही सशक्त विचार से परिपूर्ण रचना! आत्मरक्षा में ही समस्त स्त्री जाति का कल्याण निहित हैं। अब अवतार की कल्पना बेमानी है तो उद्धार कर्ता की प्रतीक्षा हास्यस्पद! एक सार्थक रचना के लिए बधाई हरीश जी। ये लेखनी चलती रहे!
ReplyDeleteबहुत बहुत आभार महोदया 🙏
Deleteबेहद दुखद घटना। सटीक विवरण।
ReplyDeleteहौसलाअफजाई के लिए बहुत बहुत आभार महोदय 🙏
DeleteBehtareen panktiyan 💯
ReplyDeleteThank you so much
DeleteBahut badiya 💯👌👌
ReplyDeleteबहुत बहुत शुक्रिया 💐
Deleteअब जलाना होगा करके खड़ा उनको चौराहे पे
ReplyDeleteजिसने लाकर खड़ा कर दिया इंसानियत को दोराहे पे
सही मुजरिम हाथ आये और यही सजा दी जाए तब शायद कुछ भय हो इन नरपिशाचों के मन में...
बहुत सटीक प्रेरक सशक्त रचना ।
लेखनी को प्रेरित करने के लिए शुक्रिया 🙏
Deleteएक आक्रोश जिसको धरती नहीं मिल पाती ... काश हथियार बन जाए ...
ReplyDeleteSahi kaha aapne sir
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