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Thursday, July 4, 2024

वो वक़्त तो लौटा दो यार...


 तुम रख लो चाहे तोड़ने को दिल

पर नीद तो लौटा दो यार

रख लो मेरी हर एक समझदारी 

पर नादानी को कर दो गुलजार 


मैं कब तक घुट घुट कर इस रिश्ते मे 

अपना सबकुछ जाऊँगा हार 

तुम रख लो अपने सारे सूकून 

पर मेरी बेचैनी तो लौटा दो यार 


हर साँस पे भले जाओ समा 

धड़कन की चाहे रोक दो रफ्तार

तुम रख लो जिस्म का कतरा कतरा 

पर रूह तो लौटा दो यार 

 

और लौटा तो मेरी मुफलिसी 

वो अकेलापन और सपने हजार 

तुम रख लो मेरी एक एक कौडी 

पर वो वक़्त तो लौटा दो यार 


वो वक़्त जो मुझसे छुटा है 

वो नीद जो तुमने लुटा है 

वो शरारत जो थी मेरी हर बात मे 

वो विश्वास जो खुद से टूटा है 


पर लौटाओगे भी तो क्या क्या 

तुमने तो मेरे ख्वाब तक भी छीने हैं 

मुझे कर दिया कंगाल और 

खुद के जूतों पे भी जड़े नगीने हैं 



Thursday, July 14, 2022

तेरे तलबगार नहीं होंगे....


 हम एक दूसरे के अब तलबगार नहीं होंगे

तुमने मन बनाया है बिछड़ने का तो ये भी ठीक है 

तेरी किसी महफिल मे हम भी शुमार नहीं होंगे


शायद अब कभी खुशियों से हम भी बेजार नहीं होंगे

ग़र तेरे चेहरे पर आती है शिकन देख मेरी परछाई भी

वादा रहा इस सूरत के अब कभी तुम्हें दीदार नहीं होंगे


कल भी महफिलें सजेगी पर वो बहार नहीं होंगे

दवा दारू बनेगी और मैखाने अस्पताल

हम पड़े रहेंगे बिस्तर मे मगर बीमार नहीं होंगे


सच्चाई छापे शायद तब वो अखबार नहीं होंगे

बोली लगेगी और कोड़ी के भाव बिकेंगे ज़ज्बात

मगर जो कीमत दे सके वफा की वो बाजर नहीं होंगे


एक दिन तुम भी टूटोगे सपने सभी तेरे भी साकार नहीं होंगे

बहुत तड़प के करोगे याद और मिलने की मिन्नत

मगर उस दिन मिलने को तुमसे हम सरकार नहीं होंगे