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Thursday, July 4, 2024

वो वक़्त तो लौटा दो यार...


 तुम रख लो चाहे तोड़ने को दिल

पर नीद तो लौटा दो यार

रख लो मेरी हर एक समझदारी 

पर नादानी को कर दो गुलजार 


मैं कब तक घुट घुट कर इस रिश्ते मे 

अपना सबकुछ जाऊँगा हार 

तुम रख लो अपने सारे सूकून 

पर मेरी बेचैनी तो लौटा दो यार 


हर साँस पे भले जाओ समा 

धड़कन की चाहे रोक दो रफ्तार

तुम रख लो जिस्म का कतरा कतरा 

पर रूह तो लौटा दो यार 

 

और लौटा तो मेरी मुफलिसी 

वो अकेलापन और सपने हजार 

तुम रख लो मेरी एक एक कौडी 

पर वो वक़्त तो लौटा दो यार 


वो वक़्त जो मुझसे छुटा है 

वो नीद जो तुमने लुटा है 

वो शरारत जो थी मेरी हर बात मे 

वो विश्वास जो खुद से टूटा है 


पर लौटाओगे भी तो क्या क्या 

तुमने तो मेरे ख्वाब तक भी छीने हैं 

मुझे कर दिया कंगाल और 

खुद के जूतों पे भी जड़े नगीने हैं 



Monday, March 8, 2021

मैं गैर था उसके लिये गैर ही रह गया...

बनाया था जो मैंने सपनों का महल ढह गया
मैं गैर था उसके लिए गैर ही रह गया

बहुत जद्दोजहद की उसे पाने को लकीरो से 
दिल ऐसा टूटा लहू आँखों से बह गया 

मेरे ख्वाब याद सांसो तक मे समाया था वो.. 
पल भर में ही बेवजह अलविदा कह गया 

लड़ रहा था खुदा तक से भी जिसे पाने के लिए 
खुदा कसम उसी के लिए सबकुछ चुपचाप सह गया 

कड़वी मगर एक सच्चाई से वाकिफ कर गया वो 
वर्षों तक वफा की थी मैंने और अकेला रह गया 

मैं गैर था उसके लिए गैर ही रह गया..... 
                                            (हैरी)