Tuesday, June 2, 2026
पुरुषार्थ के पथ पर..
Wednesday, May 20, 2026
सृष्टि का सार...
लिंग से यदि घृणा करोगे,
सृष्टि कहाँ फिर जन्मेगी?
बीजों का अपमान करोगे,
धरती कब तक फल देगी?
एकलिंग की शरण न ली तो,
काल क्षमा फिर क्यों होगा?
जो जड़ से ही विमुख हुआ है,
उसका कौन भविष्य संजोएगा?
यह देह नहीं, यह दर्शन है,
जो कण-कण में बहता है।
सृजन-शक्ति के मौन स्रोत-सा,
हर जीवन में रहता है।
जिसने अहंकारों में आकर
इसके सत्य को ठुकराया,
उसने अपने ही हाथों से
अपना कल धुएँ में पाया।
लिंग न केवल रूप प्रकृति का,
यह संतुलन की भाषा है।
जिसने इसके मर्म को जाना,
उसके संग समय की आशा है।
न इसे भोग का विषय समझो,
न भय का अंधकार कहो।
यह तो चेतन दीप शाश्वत,
जिससे जीवन राह गहो।
संतुलित दृष्टि ही धर्म सच्चा,
बाकी सब अनुमान यहाँ।
स्वीकारों से जग चलता है,
घृणा बने श्मशान यहाँ।
यह युद्ध नहीं, संवादों का
अनहद खुलता द्वार है।
जो इसे समझ कर जी लेता,
वही सृष्टि का सार है।
Tuesday, April 21, 2026
फासलों के उस पार....
अब रोज़ तुझसे गुफ़्तगू कहाँ मयस्सर होती है,
मगर हर साँस में तेरी ही ख़बर होती है।
सच कहूँ, दिन तो किसी तरह गुज़र जाता है,
रात की हर चुप्पी तेरे नाम बसर होती है।
ख़ुदा तुझे हर ग़म की हवा से बचाए रखे,
यहाँ अपनों की नज़र भी अक्सर ख़ंजर होती है।
मैं मुस्कुरा भी दूँ तो लोग वजह पूछते हैं,
किसे बताएँ कि दिल में कैसी हज़र होती है।
(हज़र = डर)
वो तेरी हँसी… जैसे सूखे लबों पर बारिश,
वो तेरी बात… जैसे रूह पर असर होती है।
तू महफ़िल में रहे तो रौशनी उतर आए,
तेरे बिन हर बस्ती भी वीरान शहर होती है।
तेरी ख़ामोशी भी अल्फ़ाज़ से भारी लगती,
कभी समंदर, कभी डूबती लहर होती है।
मीलों फ़ासलों में भी तू दिल से दूर नहीं,
कुछ मोहब्बतें जिस्म नहीं, रूह का सफ़र होती हैं।
वक़्त की धूल ने बहुत कुछ ढक लिया लेकिन,
तेरी याद अब भी दिल में चिराग़-ए-सहर होती है।
मैं हर दुआ में तेरा नाम यूँ रखता हूँ,
जैसे सजदे में कोई आख़िरी आस ठहर होती है।
अगर कभी तेरी आँखों में उदासी उतर आए,
समझना मेरी दुआओं में कहीं कसर होती है।
शिकवा तो नहीं इन फ़ासलों से अब मुझको,
बस तेरे ठीक होने की तलब उम्रभर होती है।
कभी जो थक के बैठ जाए तेरी मुस्कुराती रूह,
मेरी याद भी शायद तेरे पास हमसफ़र होती है।
कुछ रिश्ते मुकम्मल होकर भी अधूरे रहते हैं,
और कुछ अधूरे होकर भी ताउम्र असर होती है।
सच कहूँ, तेरे बाद भी ज़िंदगी चल तो रही है,
मगर हर धड़कन में एक ख़ाली सी लहर होती है।
तू मिले न मिले, ये मुक़द्दर की बात सही,
मोहब्बत तो वही है जो दुआ बनकर अमर होती है।
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मैं कब कहाँ क्या लिख दूँ इस बात से खुद भी बेजार हूँ मैं किसी के लिए बेशकीमती किसी के लिए बेकार हूँ समझ सका जो अब तक मुझको कायल मेरी छवि का...
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वो जो कहते थे सांसे थम जायेंगी तुमसे बिछड़ कर सुना है किसी और को CPR दे रहे हैं तुम हो तुम थे और तुम्हीं रहोगे कहने वाले किसी और को प्यार...


