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Friday, September 25, 2026

अनगिनत सवाल अब भी हैं...



दिल को समझा लिया मगर मलाल अब भी है,
सब कुछ ख़त्म हो गया मगर ‘क्यों’ सवाल अब भी है।
सारी यादें, वादे और तोहफ़े जला आए हम कब के,
मगर उसका दिया पहला रुमाल अब भी है।

ये न कहना कि हमें ज़्यादा फ़र्क़ नहीं पड़ा,
जिस्म तंदुरुस्त भले, दिल बेहाल अब भी है।
आईना भी पकड़ नहीं सकता सच हमारा,
लबों पे हँसी है मगर आँखें लाल अब भी हैं।

जो छोड़ गए थे, उन्हें कभी पलटकर हमने भी नहीं देखा,
किस तरह उस गली से हुए थे रुख़्सत, ख़याल अब भी है।
अब भी पाँव काँपते हैं वापस लौटने का सोचकर,
सारे फ़साद मिट गए मगर रूह पामाल अब भी है।

न मैं, न मेरे ज़ख़्म करेंगे कभी माफ़ तुम्हें,
नफ़रत के बाद भी न जाने क्यों मोह का जंजाल अब भी है।
हर रोज़ कुरेदा है ज़ख़्म, न भरने देने के लिए,
आत्मा मर चुकी है मगर लहू में उबाल अब भी है।

न तुम चाहिए, न तुम्हारी यादें चाहिए अब,
मगर पीठ पे चिपका यादों का बेताल अब भी है।
मैं ख़ुश हूँ जैसा हूँ, जहाँ भी हूँ अब,
क्या सच में ख़ुश हूँ—दिल में ये सवाल अब भी है?



Wednesday, September 22, 2021

एक रोज़ तुम्हें बताऊँगा..

क्यूँ सारे सपने धूमिल हो रहे 

क्यूँ हवा का रुख बदल रहा है

फिर क्यूँ बारिश मे यादें उमड़ रहीं हैं 

मैं तुम्हें एक दिन बताऊंगा


क्यूँ आसमाँ में घनघोर घटा छा जाती हैं

क्यूँ एक झोंका हवा का यादों को उड़ा देती है

फिर क्यों आती हैं आंसुओ की धारा

मैं तुम्हें एक दिन बताऊंगा


क्यूँ गुज़रे लम्हों की हर एक यादें

एक तेज छुरी सी चमकती है

फिर क्यूँ प्रणय मिलन से डरता है मन 

मैं तुम्हें  किसी रोज बताऊंगा


क्यूँ मद्धम मद्धम बढ़ता वेग वर्षा का 

क्यूँ हर बूंद एक दर्द छोड़ती है

फिर क्यूँ घटा बरसती आँखों से 

मैं तुम्हें किसी दिन बताऊंगा


क्यूँ आसमान में  उठ रही अंगडाई 

क्यूँ कोई भ्रम सा साथ होता है

फिर क्यूँ पागलों सी हालत है मेरी 

मैं तुमको एक दिन बताऊंगा


काली घटाओं की गर्जन 

और तूफान के बाद का सन्नाटा

चिंतित मन के हालात भी 

मैं तुमको एक दिन बताऊँगा 


तन्हा रातों का सबब और 

हंसता चेहरा आंसू दर्द

सपने और हकीकत भी

मैं तुमको एक दिन दिखाऊंगा|

                                                  (Harry)