कौन है जो मेरे हिस्से का रो देगा,
सारे गहरे ज़ख्मों का दर्द धो देगा।
मैं अब चोला बदलना चाह रहा हूँ मगर,
कौन मेरे अपनों के लिए मेरे जैसा हो देगा।
मैं नाकामयाब रहा घर की ज़िम्मेदारी उठाने में,
कौन मेरे आँगन में खुशी के बीज बो देगा।
मत पूछो कैसी कट रही है ये निष्ठुर ज़िंदगी,
किसी ने गर हाल भी पूछा, तो बंदा रो देगा।
खुद साया भी मुझे सच का आईना दिखाता है,
मैं हर इम्तिहान के लिए तैयार हूँ, ख़ुदा जो देगा।
बहुत ऊब गया हूँ इस ज़िंदगी के ताने-बाने से,
कौन बिखरे हुए ख़्वाबों की माला को पिरो देगा।
मैंने अपना समझकर सारे हालात साँझा किए थे,
क्या मालूम था, एक दिन वही शख़्स डुबो देगा।
रिश्तों की लाज में ख़ामोश डूबता ही रहा,
ये बंदा जिस्म के साथ अपनी साँसें भी खो देगा।
मेरे जाने के बाद सिर्फ़ मेरे घर का कमरा ही सूना पड़ेगा,
जो मेरे अपनों की आँखों को आँसुओं से भिगो देगा।
दुनिया को क्या ही परवाह है मेरी और मेरे ख़्वाबों की,
वो मेरी तस्वीर को किसी दीवार पर माला से संजो देगा।
कदम ख़ुद खुशी के लिए भी बढ़ा चुका हूँ बहुत बार,
मगर मेरे जाने का दर्द कोई ताउम्र ढो देगा।
बस इसी सोच में कदम खींच लेता हूँ पीछे,
मेरे बाद मेरे अपनों के लिए मेरे जैसा कोई नहीं हो देगा।
