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Tuesday, March 31, 2026

वो खामोश है बेपरवाह नहीं....



सबको लगता है कि वो अब ख्याल नहीं करता है,
पैसे तो भेजता है मगर देखभाल नहीं करता है।
कोई जा के बता दो परदेश में बैठे बेटे का हाल,
वो क्यूँ किसी से कोई सवाल नहीं करता है।

वो चुप है तो समझो कि हालात बोलते है,
रातों के अंधेरों में उसके ख़्वाब डोलते है।
रोटी की तलाश में जो घर से दूर निकला था,
अब अश्क ही आँखों का दर्द तोलते है।

माँ की दुआएँ अभी तक साथ चलती है,
बाप की उम्मीदें भी चुपचाप पिघलती है।
हर महीने के पैसे में उसका दिल भी आता है,
बस लफ़्ज़ों की कमी है, तभी बातें नहीं निकलती है।

भीड़ में रहकर भी वो तन्हा-सा हो जाता है,
अपनों की यादों में अक्सर ही खो जाता है।
वो पूछे भी तो क्या पूछे, किससे अपने दर्द कहे,
इसलिए चुपचाप वो खामोशी का हो जाता है।

तुम इल्ज़ाम न दो उसको, वो मजबूर बहुत है,
उसकी भी आँखों में छुपा एक नूर बहुत है।
वो ख्याल नहीं करता—ये कहना भी गलत नहीं,
वो निभा रहा है सब कुछ, मगर दूर बहुत है।