Tuesday, November 16, 2021
हाँ मैं एक पुरुष हूँ...
Tuesday, November 9, 2021
गठन या पतन?
क्या उखाड़ लिया करके गठन
एक नए राज्य उत्तराखण्ड का
जिसका आज तो है ही अंधकारमय
आने वाला कल भी भेंट चढ़ रहा सिर्फ पाखंड का
लाखों ने बलिदान देकर
ढेरों सपने सजाये थे
माताओं ने भी डंडे खाए थे
धूल मे मिल गई कुर्बानी पुरखों की
चंद नाकाम हुक्मरानों के क्रियाकलाप से
आज तड़प रहा है उत्तराखंड का हर नागरिक
पलायन और बेरोजगारी के विलाप से
क्या क्या सपने देखे थे
क्या इस राज्य का आज हाल है
यू. पी. मे थे तो भी अस्तित्व की लड़ाई थी
अलग तो हुए मगर अनुत्तरित आज भी कई सवाल है
थे सपने नए राज्य मे
नयी उन्नति नए कारोबार होगा
हर हाथ होगा समृद्ध और
ना कोई बेरोजगार होगा
पर आज स्थिति ऐसी हो गई
हम खुद से ही पिछड़ रहे हैं
हमारे जल जंगल खत्म हो रहे
रोजगार के अभाव से लाखों अपनों से बिछड़ हैं
हर युवा बेरोजगार बैठा है
हर गरीब तरसता है निवाले को
हर धाम ताकता है पुनर्निर्माण को
कौन हटाए उम्मीदों पे लगे इस जाले को
अब किससे क्या उम्मीद करें
किससे अब हम मतभेद करे
खुशियां मनाए इस हाल पे राज्य के
या अलग होने पे खेद करें.....?
(हैरी)
Thursday, October 21, 2021
इंसानियत की हत्या..
अभी अभी कुछ क्षण पहले भगवन
एक खिलती कली मुरझाई है
मां ने जिसे तैयार कर
सुंदर बैग और रिबन से चोटी बनाकर
हंसती खेलती भेजा था स्कूल
जो दोबारा लौटकर आ ना सकीं घर
साथियों से हाथ छुड़ाकर
बस चंद कदमों के फासले मे
ऐसी पडी नजर शैतान की
मूर्छित पडी दरिंदगी का शिकार हो कर
भगवान, यह आपका न्याय नहीं है
तुझसे भी लाखों शिकवे हैं
किसी घर की अमर रोशनी
बुझ गई ये तो सही नहीं है
तुम तो जग के रक्षक हो
क्यूँ लाज बचाने नहीं आए
सिर्फ युग परिवर्तन से क्षीण हो गई शक्ति
तुम्हीं महाकाल के समकक्षक हो
ज्ञान के द्वार से लौट रहीं थीं
कागज़ और कलम लिए हाथ मे
पलक झपकते ही दुनियां वीरान हो गई
घर मे जिसकी माँ बाट जोह रहीं थीं
आइए कुछ क्षण शोक करें
चलो फिर से कुछ मोमबत्तियाँ जलाये
हुक्मरान फिर झूठा दिलासा देंगे
फिर से मानवता वाला ढोंग करें
आंखों के सागर सूख गए
लोग बहुत रोये हैं आज
रोते हुए जिस्म बहुत देखे थे
आज रूह भी अश्कों मे डूब गए
बेबस मां बाप मर गए जीते जी
जब कानून अंधा और गूंगा हो गया
बेहसी ने ऐसा हस्र किया था
कोई कफन भी अलग न कर सके
इंसानियत के दिल पर चाकू
सदी की सबसे बुरी खबर
सबसे काला दिन इतिहास का
सदियों तक भूला ना जाएगा
किसी भी बलात्कारी को मत छोड़ो
दुनियां से निष्कासन करो
हे ईश्वर अब खुद नीचे आकर
अत्याचारियों का अंत करो|
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मैं कब कहाँ क्या लिख दूँ इस बात से खुद भी बेजार हूँ मैं किसी के लिए बेशकीमती किसी के लिए बेकार हूँ समझ सका जो अब तक मुझको कायल मेरी छवि का...
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वो जो कहते थे सांसे थम जायेंगी तुमसे बिछड़ कर सुना है किसी और को CPR दे रहे हैं तुम हो तुम थे और तुम्हीं रहोगे कहने वाले किसी और को प्यार...

