Tuesday, May 27, 2025

दुनिया जालिम है....


 

दुनिया ज़ालिम है —
ये कोई शायर की शेख़ी नहीं,
बल्कि रोज़ सुबह की ख़बर है,
जिसे अख़बार भी छापते-छापते थक चुका है।

यहां आँसू ट्रेंड नहीं करते,
दर्द को 'डिज़ाइन' किया जाता है,
और सच्चाई?
वो तो शायद किसी पुरानी किताब के पन्नों में
धूल फाँक रही है।

यहां रिश्ते
व्हाट्सऐप के आख़िरी देखे गए समय जितने सच्चे हैं,
और भरोसा —
पासवर्ड की तरह, हर महीने बदलता रहता है।

बच्चे सपनों में खिलौने नहीं,
रखते हैं नौकरी की चिंता,
और बूढ़े,
यादों की गर्मी में ज़िंदा रहने की कोशिश करते हैं।

दुनिया ज़ालिम है,
क्योंकि यहां सवाल पूछना गुनाह है,
और खामोशी —
इंसान की सबसे क़ीमती पूंजी।

पर फिर भी,
हम हर सुबह उठते हैं,
चेहरे पे उम्मीद का मास्क लगाते हैं,
और चल पड़ते हैं —
इस ज़ालिम दुनिया को थोड़ा बेहतर बनाने की कोशिश में।|


Saturday, April 12, 2025

तुम वो महामहिम बनो....



तुम राम बनो, रहीम बनो,

इस देश के महामहिम बनो,

और तौल सको जो धर्म-अधर्म को,

तुम वो आधुनिक मशीन बनो...

सत्ता का तुमको गर्व न हो,

ना सिर्फ जीत की अभिलाषा हो,

तुमसे भय हो हर सशक्त को,

पर तुमसे हर गरीब को आशा हो।

तेरे बल से तू जग को जीते,

पर कर्मनिष्ठ हो युधिष्ठिर जैसा,

जब बात न्याय-धर्म की आए,

निर्णय में अपना-पराया कैसा।

जैसे भेद न करता सूर्य

राजा और रंक में,

जैसे शीतलता देना प्रकृति है

कोसों मील विचरते मयंक में।

तू भी अपना धर्म निभाना,

चाहे वजह ज़ोरू या ज़मीन हो,

तुम हो प्रधान सेवक जनमानस के,

चाहे ओहदे से महामहिम हो।

जय हिन्द।




Friday, March 14, 2025

शिक्षा : जीवन का आधार



 तुम हो चंचल, तुम हो ढीठ,
आलस ने बाँधी मन की रीढ़।
लाख समझाया फिर भी तुम,
दोहराते हो भूलें अतीत।

ना गुरुजी की डाँट का भय,
ना अपमान का कोई संशय।
हरदम दण्ड की पंक्ति में खड़े,
फिर क्यों न चुनते हो सत्पथ नय।

शिक्षा तुमको लगती बोझ,
मजबूरी में ढोते बस्ते रोज।
बेमन से पाया गया जो ज्ञान,
जीवन में भर देता संकोच।

गर मन से विद्या करो अर्जित,
मूढ़ भी विद्वान बन जाता।
कर्मभूमि के इस चक्र में फिर,
युगों-युगों तक यश पाता।

शिक्षा ही सच्चा ज्ञान दिलाती,
धरती पर सम्मान दिलाती।
चहुँमुखी विकास का दीप जलाकर,
जुगनू-सा प्रकाश फैलाती।

यह अज्ञान तम हर लेती है,
जीवन में नव प्रभात भरती।
सूखे मन के निर्जन वन में,
आशा की हरियाली करती।

तो श्रम करो, पुरुषार्थ जगाओ,
अपने जीवन को सफल बनाओ।
शिक्षा वह निर्मल अमृत है,
जिसे ग्रहण कर समर्थ बन जाओ।

कल के तुम निर्माणक हो,
भारत के नव-अभियानक हो।
विद्या को अपना शस्त्र बनाकर,
उज्ज्वल युग के उद्घोष के लायक हो।