Thursday, July 4, 2024

वो वक़्त तो लौटा दो यार...


 तुम रख लो चाहे तोड़ने को दिल

पर नीद तो लौटा दो यार

रख लो मेरी हर एक समझदारी 

पर नादानी को कर दो गुलजार 


मैं कब तक घुट घुट कर इस रिश्ते मे 

अपना सबकुछ जाऊँगा हार 

तुम रख लो अपने सारे सूकून 

पर मेरी बेचैनी तो लौटा दो यार 


हर साँस पे भले जाओ समा 

धड़कन की चाहे रोक दो रफ्तार

तुम रख लो जिस्म का कतरा कतरा 

पर रूह तो लौटा दो यार 

 

और लौटा तो मेरी मुफलिसी 

वो अकेलापन और सपने हजार 

तुम रख लो मेरी एक एक कौडी 

पर वो वक़्त तो लौटा दो यार 


वो वक़्त जो मुझसे छुटा है 

वो नीद जो तुमने लुटा है 

वो शरारत जो थी मेरी हर बात मे 

वो विश्वास जो खुद से टूटा है 


पर लौटाओगे भी तो क्या क्या 

तुमने तो मेरे ख्वाब तक भी छीने हैं 

मुझे कर दिया कंगाल और 

खुद के जूतों पे भी जड़े नगीने हैं 



Wednesday, June 5, 2024

सत्ता सत्य पर भारी....


 देख कर लोकसभा का परिणाम

मन बहुत ही खिन्न हो गया

वो तो संगठित रहे पूरे जुनून से

मगर हिन्दू छिन्न भिन्न हो गया


जो सत्य सनातन का सारथी बना

उसके साथ ही बहुत बड़ा छल हो गया

जिनसे हर हाथ को दिया नयी ताकत

वो ही असहाय और निर्बल हो गया


जिसने प्रभु श्रीराम का मंदिर बनवाया

वह बहुमत भी ना पा पाया

हुए सफल राम का अस्तित्व पूछने वाले

हाय ये कैसा कलयुग आया


हिन्दू अपनी इसी भूल के वजह से

इतिहास मे भी कई बार हारा है

जिसको ये समझ रहे नया सवेरा

ये भूल डुबाने वाली दुबारा है


बहुत दुखी होंगे लखन और हनुमान

मन कुंठित प्रभु श्रीराम का भी होगा

जिन्होंने निर्बल किए है हाथ सनातन के

क्या उनको एहसास अंजाम का भी होगा?


सब भूल गए संदेशखाली और पालघर 

क्या याद नहीं ओवैसी के मंसूबे

तुम एक को हटाने के खातिर 

पूरे राष्ट्र को ही ले डूबे 


बहकावे मे आकर गैरों के 

तुमने ये कैसा कृत्य कर डाला 

सिंचित कर दिया विष व्यापत तनों को 

और खुद के जड़ों को ही जला डाला || 

Written by HARISH 




Saturday, May 11, 2024

सबके पास माँ नहीं होती...


जिसके रूठ जाने से कबूल
मंदिर में पूजा और मस्जिद में अज़ान नहीं होती,
कदर किया करो "दोस्तों"
बेवजह प्यार लुटाने को
सबके पास माँ नहीं होती ||

जब साया हो माँ की ममता का
मुश्किल दौर भी कट जाता है,
तुम्हें खुशियों का जहान देने वाली का
वक़्त चंद लम्हों में सिमट जाता है।
नि:स्वार्थ प्रेम की प्रतिमा के
हर दर्द की दास्तां नहीं होती,
कभी तुम भी पूछ लिया करो हाल उसका "दोस्तों"
बेशुमार प्यार लुटाने को
सबके पास माँ नहीं होती ||

जाने का उसका घाव
भगवान भी भर नहीं पाता,
सबसे रिश्ते धूमिल हो जाते हैं
चाहे वो इंसान हो या भाग्य विधाता।
कुनबे को जिसने सींचा, संभाला
उसके बगैर कोई शान नहीं होती,
ध्यान रखा करो "दोस्तों"
अपने हर ग़म को बाँटने के लिए
सबके पास माँ नहीं होती ||

जिसकी मौजूदगी ही घर में
एक नई ऊर्जा का संचार कर देती है,
खुद की झोली खाली हो भले
सबकी खुशियों से भर देती है।
उसका भी कभी हाथ बँटा दो,
मत सोचो उसको थकान नहीं होती,
वक़्त रहते थोड़ा प्यार जता लो "दोस्तों"
प्यार जताने को
सबके पास माँ नहीं होती ||

तुम्हारे दुःख, दर्द, आँसू हरने का
जिसने जिम्मा उठाया है,
रब हर घर की रखवाली कर नहीं सकता
शायद तभी उसने माँ को बनाया है।
कली भी बिन ममता की छाँव
स्वयं जवाँ नहीं होती,
संजो के रखो इन बूढ़ी तरसती आँखों को "दोस्तों"
भूखे पेट भी आशीर्वाद देने को
सबके पास माँ नहीं होती ||
HAPPY MOTHER'S DAY ❤️