क्या उखाड़ लिया करके गठन
एक नए राज्य उत्तराखण्ड का
जिसका आज तो है ही अंधकारमय
आने वाला कल भी भेंट चढ़ रहा सिर्फ पाखंड का
लाखों ने बलिदान देकर
ढेरों सपने सजाये थे
माताओं ने भी डंडे खाए थे
धूल मे मिल गई कुर्बानी पुरखों की
चंद नाकाम हुक्मरानों के क्रियाकलाप से
आज तड़प रहा है उत्तराखंड का हर नागरिक
पलायन और बेरोजगारी के विलाप से
क्या क्या सपने देखे थे
क्या इस राज्य का आज हाल है
यू. पी. मे थे तो भी अस्तित्व की लड़ाई थी
अलग तो हुए मगर अनुत्तरित आज भी कई सवाल है
थे सपने नए राज्य मे
नयी उन्नति नए कारोबार होगा
हर हाथ होगा समृद्ध और
ना कोई बेरोजगार होगा
पर आज स्थिति ऐसी हो गई
हम खुद से ही पिछड़ रहे हैं
हमारे जल जंगल खत्म हो रहे
रोजगार के अभाव से लाखों अपनों से बिछड़ हैं
हर युवा बेरोजगार बैठा है
हर गरीब तरसता है निवाले को
हर धाम ताकता है पुनर्निर्माण को
कौन हटाए उम्मीदों पे लगे इस जाले को
अब किससे क्या उम्मीद करें
किससे अब हम मतभेद करे
खुशियां मनाए इस हाल पे राज्य के
या अलग होने पे खेद करें.....?
(हैरी)

7065976643
ReplyDelete😊😊😊
Delete👍👍👌👌
ReplyDeleteशुक्रिया....
Deleteसमसामयिक परिस्थितियाँ बयान करती पंक्तियाँ... सोचना का है कि हमने क्या चाहा था और आखिर में क्या पाया...
ReplyDeleteलाखों क्रान्तिकारियों की मेहनत पे पानी फिरता नजर आ रहा है अगर हालात ऐसे ही रहे तो
Deleteजी नमस्ते ,
ReplyDeleteआपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल गुरुवार(११-११-२०२१) को
'अंतर्ध्वनि'(चर्चा अंक-४२४५) पर भी होगी।
आप भी सादर आमंत्रित है।
सादर
आपका बहुत-बहुत आभार Mam
Deleteसुन्दर रचना
ReplyDeleteधन्यवाद
Deleteसुन्दर पंक्तियाँ
ReplyDeleteबहुत-बहुत आभार
Deleteसटीक
ReplyDeleteबहुत-बहुत आभार गुरुजी 🙏
Deleteगहन चिंतन परक लेख चिंतनीय परिस्थितियों पर।
ReplyDeleteशुक्रिया... भावना को समझने के लिए 🙏
Deleteउत्तराखंड राज्य बना !
ReplyDeleteअवसरवादियों ने मलाई खाई और जनता ने धोखे खाए !
सही कहा sir आपने
Deleteधूल मे मिला दी कुर्बानी
ReplyDeleteहर दिल मे ये गुबार है
हर उत्तराखंड के क्रांतिकारी का
हम सब पे ये उधार है
बहुत सटीक...
सच उत्तराखंड बस तरस कर रह गया विकास के लिए।
सबके सपने सपने ही रह गए...
Deleteजिस उम्मीद और उत्साह के साथ नया राज्य बना था, उसका आज इतना बेहाल होना सच में दुखद है। तुम्हारी पंक्तियों में सिर्फ ग़ुस्सा नहीं, बल्कि गुबार और निराशा भी झलकती है, जो लोगों की वास्तविक स्थिति बताती है। सच कहूँ तो ये हमें सोचने पर मजबूर करती है कि सिर्फ अलग होने से कुछ नहीं बदलता, मेहनत और जिम्मेदारी दोनों चाहिए।
ReplyDeleteशतप्रतिशत सत्य
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