Saturday, October 10, 2026

किसे आवाज़ देता...



किसे आवाज़ देता तुम बताओ.......? 

मेरी नैया मेरे साहिल से किनारा कर गई थी,
मेरे सपनों की दुनिया महामारी से गुजर गई थी।
कई अपनों ने छुरा घोंप दिया था पीठ पर मेरे,
कई लोगों की इंसानियत तड़पकर मर गई थी।

कहीं जालसाज़ी ने मेरे रिश्तों में घर किया था,
कई मेरे सपनों ने गरीबी में गुजर-बसर किया था।
तुम्हीं बताओ, किसके दर पे जाता, किसे पुकारता,
मेरा साया ही मेरे ख़्वाबों की दुनिया तबाह कर गया था।

कहीं संबंधों में नाराज़गी की अग्नि सुलग रही थी,
कभी मेरी ही साँसें बोझिल होकर थक रही थीं।
मेरी कलम भी बुरी बन गई थी सच्चाई लिख-लिखकर,
किसी की रचना चापलूसी के पन्नों से महक रही थी।

किसे दुखड़े सुनाता और किसे गले लगाता,
हम दोनों का ही मन एक-दूजे से भर गया था।
कहाँ चादर चढ़ाता और कहाँ धागे मैं बाँधता,
अपनी परेशानियों को लेकर मैं भटक दर-दर गया था।

किसे कहता, मेरी किश्ती को डूबने से बचा लो,
मैं बिगड़ी क़िस्मत और नौका लिए उतर समंदर गया था।
पकड़नी थी मुझे खोई रफ्तार और बिखरे सपने,
जिसे मेरी लापरवाही ही निगल बन भंवर गई थी। 

किसे आवाज़ देता, तुम बताओ...? 




2 comments:

  1. नय्या नहीं नैया | सुंदर |

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    1. बहुत बहुत शुक्रिया गुरुजी 🙏

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