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Tuesday, August 18, 2026

तुम ही तो हो....


एक लड़की है...

जो हर पाँच मिनट में कुछ न कुछ भूल जाती है,

कभी फ़ोन कहाँ रखा, कभी चश्मा कहाँ छोड़ा,

कभी खुद ही पूछकर अपना सवाल तक भूल जाती है।


फिर मासूम-सा चेहरा बनाकर कहती है—

"अरे यार... मैं तो भूल गई!"

और दुनिया की सारी नाराज़गी

उस एक मुस्कान के आगे हार जाती है।


वो चुलबुली है,

जैसे तितलियों ने हवा को हँसना सिखाया हो।

उसकी बातें कभी पूरी नहीं होतीं,

लेकिन दिल हमेशा पूरा जीत लेती हैं।


उसकी शरारतें किसी को सताने के लिए नहीं,

हर उदास चेहरे पर हँसी टाँक देने के लिए होती हैं।


वो नटखट है, पर किसी का दिल दुखाना नहीं जानती।

वो भूलक्कड़ है, पर रिश्ते निभाना कभी नहीं भूलती।


उसके पास बहुत बड़ी दौलत नहीं,

पर एक ऐसा दिल है

जिसमें छल की जगह नहीं,

सिर्फ़ अपनापन रहता है।


शायद उसे आज तक ये एहसास भी नहीं हुआ,

कि उसकी हर "अरे, मैं भूल गई..."

किसी की सबसे प्यारी याद बन चुकी है।


और अगर...

ये कविता पढ़कर किसी लड़की के होंठों पर

बिना वजह मुस्कान आ जाए,

और वो मन ही मन कहे—

"ये तो बिल्कुल मेरी बात है..."


तो समझ जाना,

कविता ने अपना सही पता ढूँढ़ लिया है।




Tuesday, April 21, 2026

फासलों के उस पार....



अब रोज़ तुझसे गुफ़्तगू कहाँ मयस्सर होती है,
मगर हर साँस में तेरी ही ख़बर होती है।
सच कहूँ, दिन तो किसी तरह गुज़र जाता है,
रात की हर चुप्पी तेरे नाम बसर होती है।

ख़ुदा तुझे हर ग़म की हवा से बचाए रखे,
यहाँ अपनों की नज़र भी अक्सर ख़ंजर होती है।
मैं मुस्कुरा भी दूँ तो लोग वजह पूछते हैं,
किसे बताएँ कि दिल में कैसी हज़र होती है।
(हज़र = डर)

वो तेरी हँसी… जैसे सूखे लबों पर बारिश,
वो तेरी बात… जैसे रूह पर असर होती है।
तू महफ़िल में रहे तो रौशनी उतर आए,
तेरे बिन हर बस्ती भी वीरान शहर होती है।

तेरी ख़ामोशी भी अल्फ़ाज़ से भारी लगती,
कभी समंदर, कभी डूबती लहर होती है।
मीलों फ़ासलों में भी तू दिल से दूर नहीं,
कुछ मोहब्बतें जिस्म नहीं, रूह का सफ़र होती हैं।

वक़्त की धूल ने बहुत कुछ ढक लिया लेकिन,
तेरी याद अब भी दिल में चिराग़-ए-सहर होती है।
मैं हर दुआ में तेरा नाम यूँ रखता हूँ,
जैसे सजदे में कोई आख़िरी आस ठहर होती है।

अगर कभी तेरी आँखों में उदासी उतर आए,
समझना मेरी दुआओं में कहीं कसर होती है।
शिकवा तो नहीं इन फ़ासलों से अब मुझको,
बस तेरे ठीक होने की तलब उम्रभर होती है।

कभी जो थक के बैठ जाए तेरी मुस्कुराती रूह,
मेरी याद भी शायद तेरे पास हमसफ़र होती है।
कुछ रिश्ते मुकम्मल होकर भी अधूरे रहते हैं,
और कुछ अधूरे होकर भी ताउम्र असर होती है।

सच कहूँ, तेरे बाद भी ज़िंदगी चल तो रही है,
मगर हर धड़कन में एक ख़ाली सी लहर होती है।
तू मिले न मिले, ये मुक़द्दर की बात सही,
मोहब्बत तो वही है जो दुआ बनकर अमर होती है।