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Wednesday, September 2, 2026

व़क्त का पहिया...


आज जो तरस रहे हैं चंद ख़ुशियों की ख़ातिर,
कल वही ख़ुशियों के आफ़ताब भी हो सकते हैं।
क़दर कर लो वक़्त रहते आज उनकी,
कल वे तुमसे ज़्यादा कामयाब भी हो सकते हैं।

जो आज झुककर तुम्हारे सामने खड़े हैं,
कल वही आसमानों के ख़्वाब भी हो सकते हैं।
जिन्हें तुमने समझा है कमज़ोर और नाकारा,
कल वही किसी रियासत के नवाब भी हो सकते हैं।

हर शख़्स की कहानी कहाँ चेहरे से पढ़ोगे,
यहाँ हर चेहरे के पीछे कई नक़ाब भी हो सकते हैं।
जिन आँखों में आज नमी दिखाई देती है,
कल उन्हीं आँखों में ख़ुशियों के सैलाब भी हो सकते हैं।

ज़िंदगी के इम्तिहाँ में जो आज पीछे चल रहे हैं,
कल वही अपने हुनर में लाजवाब भी हो सकते हैं।
जो आज तुम्हारी राह में काँटे बिछा रहे हैं,
कल वही तुम्हारी राह के गुलाब भी हो सकते हैं।

किसी की ख़ामोशी को कमज़ोरी मत समझना,
ख़ामोश लोग अक्सर इंक़लाब भी हो सकते हैं।
आज जिनके हिस्से में बस ठोकरें आई हैं,
कल उनके नाम से कई ख़िताब भी हो सकते हैं।

आज जो पन्नों की तरह बिखरे पड़े हैं राहों में,
कल वही दौर की मुकम्मल किताब भी हो सकते हैं।
वक़्त का पहिया बदलते देर नहीं लगती, ‘हैरी’,
आज के सवाल, कल के जवाब भी हो सकते हैं।

वक़्त की फ़ितरत है बदलते जाना,
आज के पत्थर कल महताब भी हो सकते हैं।
आज जो तुमसे गुरूर में दूरियाँ बनाए बैठे हैं,
कल तुमसे मिलने को बेताब भी हो सकते हैं।



Tuesday, April 21, 2026

फासलों के उस पार....



अब रोज़ तुझसे गुफ़्तगू कहाँ मयस्सर होती है,
मगर हर साँस में तेरी ही ख़बर होती है।
सच कहूँ, दिन तो किसी तरह गुज़र जाता है,
रात की हर चुप्पी तेरे नाम बसर होती है।

ख़ुदा तुझे हर ग़म की हवा से बचाए रखे,
यहाँ अपनों की नज़र भी अक्सर ख़ंजर होती है।
मैं मुस्कुरा भी दूँ तो लोग वजह पूछते हैं,
किसे बताएँ कि दिल में कैसी हज़र होती है।
(हज़र = डर)

वो तेरी हँसी… जैसे सूखे लबों पर बारिश,
वो तेरी बात… जैसे रूह पर असर होती है।
तू महफ़िल में रहे तो रौशनी उतर आए,
तेरे बिन हर बस्ती भी वीरान शहर होती है।

तेरी ख़ामोशी भी अल्फ़ाज़ से भारी लगती,
कभी समंदर, कभी डूबती लहर होती है।
मीलों फ़ासलों में भी तू दिल से दूर नहीं,
कुछ मोहब्बतें जिस्म नहीं, रूह का सफ़र होती हैं।

वक़्त की धूल ने बहुत कुछ ढक लिया लेकिन,
तेरी याद अब भी दिल में चिराग़-ए-सहर होती है।
मैं हर दुआ में तेरा नाम यूँ रखता हूँ,
जैसे सजदे में कोई आख़िरी आस ठहर होती है।

अगर कभी तेरी आँखों में उदासी उतर आए,
समझना मेरी दुआओं में कहीं कसर होती है।
शिकवा तो नहीं इन फ़ासलों से अब मुझको,
बस तेरे ठीक होने की तलब उम्रभर होती है।

कभी जो थक के बैठ जाए तेरी मुस्कुराती रूह,
मेरी याद भी शायद तेरे पास हमसफ़र होती है।
कुछ रिश्ते मुकम्मल होकर भी अधूरे रहते हैं,
और कुछ अधूरे होकर भी ताउम्र असर होती है।

सच कहूँ, तेरे बाद भी ज़िंदगी चल तो रही है,
मगर हर धड़कन में एक ख़ाली सी लहर होती है।
तू मिले न मिले, ये मुक़द्दर की बात सही,
मोहब्बत तो वही है जो दुआ बनकर अमर होती है।