Sunday, June 19, 2022
पापा.. "मेरे वजूद के रखवाले"
Thursday, June 9, 2022
बगावत की लहर.....
क्यूँ देश जल रहा दंगों के आग मे
फिर किसने लिख दी नफरत के कलम से
ये विध्वंस राष्ट्र के भाग मे
क्यूँ मरने मारने की खबर आती है
क्यूँ धर्म पे बात विवाद हो रहे हैं पैनलों मे
क्यूँ नफरत के बीज़ बोते सुनायी देते हैं
कुछ हुक्मरान टीवी चैनलों मे
क्या देश अपने भाई चारे का
अस्तित्व खोकर रह गया
जो कल तक था सभी धर्मों का देश
अब चंद लोगों का बन कर रह गया
वो हिन्दू मुश्लिम करके अपना
वोट बैंक तगड़ा कर रहे
ये ना समझ उनकी बातों मे आकर
आपस मे झगड़ा कर रहे
पढ़े लिखे होकर भी सभी
जाहिल सी हरकत करते हैं
खुद के सोच का गला घोंट कर
जमूरे सी करतब करते हैं
सिर्फ दंगों से ना देश जला रहा
तुम्हारा भविष्य भी है जल रहा
वो तुमको सीढ़ी बनाकर आगे बढ़ने वाला
तुमको खाक की धूल सा कुचल रहा
अब तो जागो मेरे देश की जनता
कुछ अपनी बुद्धि का भी प्रयोग करो
छोड़ो आपस की रंजिशें और
देश के विकास मे सहयोग करो
Thursday, May 12, 2022
मन करता है....
मन करता है दूर कहीं
डूबते सूरज को देखूं
शांत बहते किसी सागर मे
एक कंकड़ तबीयत से फैंकू
कुछ पल छीन कर इस दुनिया से
खुद के पूरे कुछ ख्याब करूँ
मन करता है पंख फैलाकर
इस नीलगगन की सैर करूं
ये घुटन, पाबंदी और जिम्मेदारी
सब कुछ पल भर मे उतार दूँ
मन करता है सदियों की ज़िन्दगी
बस एक पल मे ही गूजार दूँ
अब कैसे बयां करूँ शब्दों में
कितना कुछ दबाया है मन मे
मन करता है लिखता जाऊँ
क्या क्या सहा है इस जीवन मे...
(हैरी)
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मैं कब कहाँ क्या लिख दूँ इस बात से खुद भी बेजार हूँ मैं किसी के लिए बेशकीमती किसी के लिए बेकार हूँ समझ सका जो अब तक मुझको कायल मेरी छवि का...
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क्यों अपना ही घर हमें, छोड़कर भागना पड़ा हुक्मरान थे नींद में, हमें जागना पड़ा पुस्तैनी ज़मीं छोड़ी, सपनों का मकाँ गया किलकारियों से गूँजता,...





