Thursday, September 25, 2025

बंद कमरों की सिसकियाँ...



 दीवारें चुप हैं, पर उनमें दरारें बहुत हैं,
चुप्पियों के पीछे दबी पुकारें बहुत हैं।

हर मुस्कुराते चेहरे के पीछे जो छिपा है,
उस दर्द के समंदर के किनारे बहुत हैं।

घर है ये या कोई सज़ा की कोठरी,
यहाँ रिश्तों की बोली में बेगारे बहुत हैं।
जहाँ हर थप्पड़ के बाद यही सुनाई देता है—
“सिसकियाँ बंद करो, वरना विकल्प तुम्हारे बहुत हैं।”

कहीं माँ का आँचल जलती सिगरेट से जला,
कहीं डरे-सहमे पुरुष बेचारे बहुत हैं।
जिसे जैसे ढाला समाज ने, वैसे ही ढल गए,
क्योंकि ढोंगी समाज-सुधारक हमारे बहुत हैं।

रात की ख़ामोशी में चीखें गूँजती बहुत हैं,
खंडहर मकानों की अब भी दीवारें बहुत हैं।
अंदरूनी बातें हवा से भी तेज़ फैलती हैं,
प्लास्टर वाले घरों में भी दरारें बहुत हैं।

दर्द अब लिपस्टिक के नीचे छुपा रहता है,
आँखों में बेबसी के मगर नज़ारे बहुत हैं।
तहज़ीब सिखाई जाती है सिर्फ बेटियों को ही,
“खुले सांड से घूम रहे बेटे प्यारे बहुत हैं।”

रिश्तों की आड़ में ज़ुल्म सहते लोग यहाँ,
धीरे-धीरे ज़िंदगी से हारे बहुत हैं।
और समाज “मामला व्यक्तिगत” कहकर चुप है,
ये मीठा बोलने वाले भी खारे बहुत हैं।

अब वक़्त है इन बंद कमरों की साँकलें तोड़ने का,
हर ख़ामोशी को आवाज़ देने को मीनारें बहुत हैं।
मिलेगा न्याय और अधिकार हर मज़लूम को यहाँ,
दृढ़ और सशक्त अब भी दरबारें बहुत हैं।



Tuesday, September 16, 2025

“एक राष्ट्र, अनगिनत राग”


 हिमालय की गोद में बसा कश्मीर,

बर्फ़ की चादर में डल झील की तासीर।

हिमाचल की घाटियों में देवता उतरते हैं,

उत्तराखंड की नदियों में खुद शिव जल भरते हैं।


पंजाब की सरसों गाती है वीरों का गान,

हरियाणा की मिट्टी है मेहनत की शान।

गंगा-यमुना का मिलन से बनाता यू. पी. महान,

बिहार के गया व नालंदा ने दिया विश्व को ज्ञान।


लाल क़िले से गूँजती है स्वतंत्रता की शपथ,

क़ुतुब से संसद तक गढ़ा है लोकतंत्र का पथ ।

गंगा-जमुनी तहज़ीब की पनाह मे सबका एक मत,

दिल्ली है दिल, जहाँ से धड़कता है पूरा भारत।


झारखंड के जंगलों में ढोल की थाप,

छत्तीसगढ़ की धरती पर जनजातियों का आलाप।

ओडिशा की रथयात्रा खींचती है श्रद्धा की डोर,

बंगाल की हवा में अब भी साहित्य का शोर।


सिक्किम के फूलों से खुसबू हर पल,

अरुणाचल है भारत का सूर्योदय स्थल।

आसाम की चाय से महकती हर टपरी,

मेघालय के बादलों में दिखती है बेफिक्री।


नगालैंड के पर्व और रंग बिरंगे परिधान 

मणिपुर का नृत्य और खेल भारत के शान।

मिज़ोरम की पहाड़ियों से झरनों का गीत,

त्रिपुरा की गलियों में इतिहास का मीत।


गुजरात का गरबा और गिर के शेर 

राजस्थान मे ही है "भारत का मक्का" अजमेर ।

महाराष्ट्र की धड़कन है छत्रपती शिवाजी महान,

गोवा 'स्वतंत्रता-संग्राम' की अंतिम जीत की पहचान |


कर्नाटक की वीणा में गूंजते है प्राचीन राग,

केरल की नावों संग बहता शीतल बैराग।

तमिलनाडु में प्राचीन मंदिर और दक्खिन का पठार

आंध्र-तेलंगाना में प्रसिद्ध बालाजी और चारमीनार।


अंडमान-निकोबार दिखलाती स्वतंत्रता का समर्पण,

लक्षद्वीप के नीले पानी में झलकता है ईश्वर का दर्पण।

'लौहपुरुष' ने सब रियासतों को मिलाकर किया कार्य नेक 

"अब राज्य तमाम है, मगर भारत सबकी आत्मा एक"



Sunday, September 7, 2025

CPR दे रहे हैं....

 

वो जो कहते थे सांसे थम जायेंगी तुमसे बिछड़ कर
सुना है किसी और को CPR दे रहे हैं

तुम हो तुम थे और तुम्हीं रहोगे कहने वाले
किसी और को प्यार बेशुमार दे रहे हैं

किस हद तक देखना पड़ेगा दुनियां का ये दोगलापन
बेवफा लोग आजकल वफा पे ज्ञान यार दे रहे हैं

हमसे हर बात पर तकरार करने वाले,
अब खुलेआम लोगों को उधार दे रहे हैं


बंद कमरे मे एकांत वास हो जाते थे जो घंटों तक
हमसे दूरी क्या बड़ी सबको समय बार बार दे रहे हैं

चेहरे पे नकाब है या नक़ाब मे चेहरा
लगता है ऐसे लोगों को तवज्जो हम भी बेकार दे रहे हैं