Sunday, August 1, 2021
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मैं कब कहाँ क्या लिख दूँ इस बात से खुद भी बेजार हूँ मैं किसी के लिए बेशकीमती किसी के लिए बेकार हूँ समझ सका जो अब तक मुझको कायल मेरी छवि का...
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ऐसा भी नहीं कि हार रहा हूँ मैं, मगर धीरे-धीरे ज़िंदगी से मन मार रहा हूँ मैं। बहुत कुछ देख लिया इन चार दिनों की उम्र में, लगता है पिछले जन्मो...
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