Wednesday, September 22, 2021

एक रोज़ तुम्हें बताऊँगा..

क्यूँ सारे सपने धूमिल हो रहे 

क्यूँ हवा का रुख बदल रहा है

फिर क्यूँ बारिश मे यादें उमड़ रहीं हैं 

मैं तुम्हें एक दिन बताऊंगा


क्यूँ आसमाँ में घनघोर घटा छा जाती हैं

क्यूँ एक झोंका हवा का यादों को उड़ा देती है

फिर क्यों आती हैं आंसुओ की धारा

मैं तुम्हें एक दिन बताऊंगा


क्यूँ गुज़रे लम्हों की हर एक यादें

एक तेज छुरी सी चमकती है

फिर क्यूँ प्रणय मिलन से डरता है मन 

मैं तुम्हें  किसी रोज बताऊंगा


क्यूँ मद्धम मद्धम बढ़ता वेग वर्षा का 

क्यूँ हर बूंद एक दर्द छोड़ती है

फिर क्यूँ घटा बरसती आँखों से 

मैं तुम्हें किसी दिन बताऊंगा


क्यूँ आसमान में  उठ रही अंगडाई 

क्यूँ कोई भ्रम सा साथ होता है

फिर क्यूँ पागलों सी हालत है मेरी 

मैं तुमको एक दिन बताऊंगा


काली घटाओं की गर्जन 

और बारिश के बाद का सन्नाटा

चिंतित मन के हालात भी 

मैं तुमको एक दिन बताऊँगा 


तन्हा रातों का सबब और 

हंसता चेहरा आंसू दर्द

सपने और हकीकत भी

मैं तुमको एक दिन दिखाऊंगा|

                                                  (Harry) 

Thursday, September 9, 2021

जंग या जिंदगी?

 


हर  युद्ध के बाद

किसी को तो सफाई करनी ही है।

हालत नहीं कर सकते 

आखिर खुद को तो सही करो।

 

किसी को तो ढकेलना ही है 

 मलवा सड़क के किनारों तक,

 तभी तो लाश से भरी गाड़ियाँ

 आगे बढ़ सकती हैं ।


 किसी का पैर तो फंसना ही है 

 कीचड़ और राख में,

 टूटी कुर्सियाँ और खून से लथपथ कपड़े 

 है एक और नए बटवारे के फ़िराक़ मे 


 किसी को तो गढ़ना होगा बुनियाद मे 

 दीवार खड़ी करने के लिए,

 किसी को रोशनदान बनकर,

 शुद्ध हवा को भीतर लाना होगा।


 तत्काल बना यह नहीं है,

 वर्षों से सुलगती आग है ये 

 सारे हथियार फिर से तैयार हैं

 एक और युद्ध के लिए।


हमें फिर से आवश्यकता होगी

एक जुट होकर आगे आने की।

गृह क्लेश से विश्व युद्ध तक रोक कर 

बिखरते शांति को संजोने की।


कैसे, हाथ में छड़ी,

अभी भी याद है कि वह कैसा था।

शांति अहिंसा दो हथियारों से 

क्रूर शासन का तख्त हिलाता था।


आस्तीनों मे 

अभी भी कई साँप पल रहे हैं 

जंग लगे हो कारतूसों मे भले 

जाबांज हौसलों से ही शेषनाग के फन कुचल रहे है।


घास में जो उग आये हैं 

फिर से रक्तरंजित कुछ कोंपले 

किसी को तो बढ़ाना ही होगा

जर जर टूटते हौसले|

                       (हैरी)



Sunday, September 5, 2021

गुरु महिमा अपरम्पार

प्रभु तेरा गुणगान कर सकूँ

इस काबिल जिसने बनाया है

मेरे अज्ञानरूपी अंधकार में

ज्ञान का दीपक जलाया है|


उन गुरुओं के चरणों मे सदा

शीश अपना झुकाया है

प्रभु तेरे इस दिव्य स्वरुप को

आखर -आखर से सजाया है|


जिसने ज्ञान की जोत जलायी

जिसने अक्षर की पहचान दिया

गुरु के ज्ञान से होकर काबिल

सबको जग ने सम्मान दिया|


उस गुरु का मान रख सकें

प्रभु इतना वरदान देना

हम भी गुरु पग चिह्न पर चले

हमको सन्मार्ग की पहचान देना|


मेरे गुरु तारणहार है मेरे

मेरे पहले भगवान भी

हे गुरुवर! तुम ज्ञाता हो जग के

प्रभु तुल्य इंसान भी|


महिमा तुम्हारी वर्णन कर सकूँ 

मुझमे इतना ज्ञान नहीं 

वह मंदिर भी श्मशान सा मेरे लिए 

जहां गुरुओं का सम्मान नहीं|


शब्द नहीं उचित उपमा को 

अब कलम को देता विराम हूँ 

गुरुवर आप अजर अमर रहें 

चरणों मे करता प्रणाम हूँ 

चरणों में करता प्रणाम हूँ|

                     ... (हैरी) 



शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं 

Tuesday, August 31, 2021

माँ का प्यार....


माँ की ममता है ही कुछ ऐसी 

जिसे कोई समझा नहीं सकता,

यह सर्वोच्च आस्था से बना है

और इसके बलिदान से बड़ा कुछ हो नहीं सकता 


 यह पाक साफ और निःस्वार्थ है

इससे स्थायी क्या हो सकता है

ना कोई उसके प्यार को छीन सकता 

 और कुछ भी इसे ना मिटा सकता है |


 यह धैर्य और क्षमाशीलता ना खोता 

भले ही भरोसा रहा हो टूट

और यह कभी विफल नहीं होता 

चाहे सबकुछ रहा हो छूट |


इसमे विश्वास अनंत अडिग है

चाहे जग निंदा करे चहु ओर 

यह पूर्ण सुंदरता से चमकता 

 सबसे चमकीले रत्न सा कहीं दूर |


 यह परिभाषित का मोहताज नहीं है,

 यह सभी तर्कों की करे निंदा 

रहस्यमय है अभी भी दुनियां के नज़रों मे 

 सृष्टि के अन्य रहस्यों की तरह,


 एक बहुत ही शानदार चमत्कार

मनुष्य समझ ही नहीं सकता

यह एक चमत्कारिक सबूत है 

खुदा के चामत्कारिक हाथों का |

                                      (हैरी)



Friday, August 27, 2021

अंत नहीं होता....



जब मैं मरूँ, मेरा जनाज़ा निकाला जा रहा हो.. 

 यह न सोचना कि मैं इस दुनिया को याद कर रहा हूँ 

 कोई अश्क न बहाए, शोक न करे , न ही कोई मन भारी करे... 

मैं राक्षस के रसातल में नहीं पड़ रहा हूँ


 जब देखो मेरा  जनाजा जाते हुए, 

  पीड़ासक्त होकर रोना नहीं... 

मैं अलविदा नहीं कह रहा हूंँ, 

मैं तो शाश्वत प्रेम से मिल रहा हूंँ।


मुझे मेरी कब्र में छोड़ आओ, तो अलविदा मत कहना.. 

 याद रखना कब्र तो जन्नत के लिए सिर्फ एक पर्दा महज है

तुमने मुझे केवल पंचतत्व मे विलीन होता देखा, 

अब मुझे पंचतत्व होता भी देखो... 


प्रकृति का अंत कैसे हो सकता है?

 नहीं हो सकता... 

 मरण सूर्यास्त सा है, अंत सा लगता है 

लेकिन वास्तव में यह भोर है.। 

गोधूलि और भोर में सूर्य चंद का अंत नहीं होता... 

दोनों मौजूद रहते हैं कहीं न् कहीं


जब मिट्टी तुम्हें खुद मे मिला लेती है,

तब आत्मा मुक्त हो जाती है।

 क्या आपने कभी किसी बीज को धरती पर गिरे हुए 

नव जीवन के साथ  उगते नहीं देखा है?

फिर मनुष्य  के बीज उगने पर संदेह कैसा ?

 अंत नहीं होता प्रकृति का..... 

                                       (हैरी)

Sunday, August 15, 2021

ये देश रहना चाहिए

जब तक गंगा यमुना मे जल है
जब तक हवा मे शीतल है
जब तक चिडियों की कलकल है
हर नस मे देशप्रेम बहना चाहिए
मैं रहूं या ना रहूं ये देश रहना चाहिए

जब तक बाजुओं मे बल है
जब तक सांसो मे हलचल है
जब तक अंतर्मन मे दंगल है
ना जुर्म कोई सहना चाहिए
मैं रहूं या ना रहूं ये देश रहना चाहिए

जब तक धरती पे जंगल है
जब तक सूर्य चंद्र और मंगल है
जब तक खेत किसान और हल है
दुश्मन का हर गुरूर ढहना चाहिए
मैं रहूं या ना रहूं ये देश रहना चाहिए

जब तक सरहद मे सेना दल है 
जब तक कांटे और कमल है 
जब तक विश्वास अटल है 
बस जय हिंद कहना चाहिए 
मैं रहूं या ना रहूं ये देश रहना चाहिए 

जब तक राग द्वेष ना मन मे छल है 
जब तक विचार निर्मल है 
जब तक धरा मे भू पटल है 
बस देशप्रेम ही गहना चाहिए 
मैं रहूं या ना रहूं ये देश रहना चाहिए 
                         Kumar Harris