Friday, July 4, 2025

कल तुम्हारे बच्चे पढ़ेंगे मेरी कहानियाँ


कोई नहीं पढ़ता मेरी लिखी कहानियाँ,
बातें भी मेरी लगती उनको बचकानियाँ।
लहू निचोड़ के स्याही पन्नों पे उतार दी,
फिर भी मेहनत मेरी लगती उनको नादानियाँ।

कल जब सारा शहर होगा मेरे आगे-पीछे,
शायद तब मेरी शोहरत देगी उनको परेशानियाँ।
मैं उनको फिर भी नहीं सुनाऊँगा उनकी हक़ीकत,
मैं भूल नहीं सकता खुदा की मेहरबानियाँ।

आज हालात नाज़ुक हैं तो तमाशा बनाते सब,
मेरी सच्चाई में भी ढूँढ़ लेते हैं खामियाँ।
मेरा भी तो है खुदा, वक़्त मेरा भी बदलेगा वो,
यूँ ही नहीं रहतीं उम्र भर वीरानियाँ।

मुझको हुनर दिया है तो पहचान भी दिलाएगा वो,
यूँ ही नहीं सौंपता कलम हाथों में निशानियाँ।
आज खुद का ही पेट भर पा रहे हैं भले,
कल हम भी करेंगे जरूरतमंदों की निगहबानियाँ।

थोड़ा सब्र कर, इतनी जल्दी न लगा अनुमान,
कामयाबी के लिए कुर्बान करनी पड़ती हैं जवानियाँ।
मैं एक-एक कदम बढ़ रहा हूँ अपनी मंज़िल की ओर,
शोहरत पाने को करता नहीं बेईमानियाँ।

हमने तो चींटी से सीखा है मेहनत का सलीका,
हमें तनिक विचलित नहीं करतीं बाज़ की ऊँची उड़ानियाँ।
वो जो तुम आज बेकार समझ के मारते हो ताने मुझे,
कल तुम्हारे बच्चे पढ़ेंगे मेरी कहानियाँ। ♥️


 

24 comments:

  1. Bahut sundar kavita, ek ek shabd dil ko chhu gaya...

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  2. Great, in today's era we all need this kind of self confidence 🙏

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  3. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" बुधवार 5 जुलाई 2025को साझा की गयी है......... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

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    1. "पांच लिंकों का आनंद" मे मेरी कविता को स्थान देने के लिए बहुत बहुत आभार. 🙏

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    1. सादर धन्यवाद गुरुजी 🙏

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  5. आपकी कविता पढ़कर 'लगे रहो मुन्ना भाई' याद आ गया

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    1. समझ नहीं आया इस प्रतिक्रिया को किस तरह लूँ, अच्छा या बुरा 😍

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  6. प्रिय हरीश जी , रचना , एक शिकवा है शिकायत है पर खुद पर गर्व की अनुभूति भी है रचना में | अच्छा लिखा है आपने | सच है हर हुनर की पहचान का एक नियत वक्त होता है | निश्चित रूप से आप जैसे युवा रचनाकार साहित्य का भावी चेहरा हैं | हार्दिक शुभकामनाएं आपके लिए |

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  7. बहुत बहुत शुक्रिया Mam, आपके शब्द हमेशा प्रेरित करते है कुछ अच्छा करने के लिए 🙏

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  8. मुझको हुनर दिया है तो पहचान भी दिलाएगा वो

    यूँही नहीं देता वो कलम हाथों मे सबको मरजानियां

    आज खुद का ही पेट भर पा रहे हैं भले...

    कल हमारे नाम से लंगर लगेगें शहर मे हानिया |

    सारे शिकवों के बाद ये सकारात्मक भाव भगवान शीघ्र पूरा करे । और आपकी मेहनत रंग लाये ।
    शानदार लेखन
    वाह!!!

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  9. सभी रचनाएं मंत्रमुग्ध करती हैं असाधारण प्रतिभा के धनी हैं आप अभिनंदन सह । 🙏

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    1. बहुत बहुत आभार और धन्यवाद जी आप को 🙏

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